बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): जिला बागपत की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एससी/एसटी पवन कुमार राय की अदालत ने फर्जी साक्ष्य तैयार करने, युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखने और एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में बुलंदशहर जिला निवासी सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह दोषी करार दिया है तथा दूसरे आरोपी सेवानिवृत्त एसआई बिजेंद्र सिंह को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया, लेकिन सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह दोषी करार होने से पहले ही फरार हो गया। अदालत ने तत्काल उसकी गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए हैं। पुलिस अब उसकी तलाश में दबिशें दे रही है।
यह है मामला:
डोडा बरामदगी के फर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2018 में अमन सिंह समेत दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि युवक को गलत तरीके से हिरासत में लेकर उसके खिलाफ मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार किए गए थे। अब अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एससी/एसटी पवन कुमार राय की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सेवानिवृत्त दरोगा अमन सिंह निवासी बुलंदशहर को दोषी करार दिया है तथा सेवानिवृत्त एसआई बिजेंद्र सिंह को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया जैसे ही अमन सिंह को अपने खिलाफ फैसले का अंदेशा हुआ, वह मौके से मुँह छुपाकर भाग निकला। अदालत ने तत्काल उसकी गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए हैं। पुलिस अब उसकी तलाश में दबिशें दे रही है।
बागपत: फर्जी ढंग से युवक को हिरासत में रखने वाला बुलंदशहर निवासी रिटायर्ड दरोगा दोषी करार, हुआ मौके से फरार
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