Monday, March 2, 2026
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“होलिकापूजन दो मार्च को रात्रि 8.15 के बाद मघा नक्षत्र एवं सुकर्मा योग में होगा तथा तीन की भोर 4 बजे से 5.30 बजे तक पूजन करना अधिक शुभ रहेगा”


बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): भद्रा व ग्रहण के होने के कारण सौहार्द व रंगों का पर्व होली 4 मार्च बुधवार तथा होलिका दहन 3 मार्च मंगलवार को सूर्योदय पूर्व 5.29 बजे से 6.19 बजे के बीच किया जाएगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष पंडित के सी पाण्डेय काशीवाले ने इस बार भद्रा-ग्रहण आदि संशय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि होलीकापूजन एवं होलिकादहन फाल्गुन पूर्णिमा को ही किया जाता है। पूर्णिमा तिथि 02 मार्च सोमवार को सायं 5.55 बजे से प्रारम्भ होकर 03 मार्च को दोपहर बाद 5.07 बजे तक रहेगा। परन्तु 2 मार्च को सायंकाळ 5.55 पर पृथ्वीलोक की अशुभ भद्रा के साथ पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होने से होलिकादहन नहीं किया जा सकता तथा 3 मार्च को अपरान्ह 3.20 से सायं 6.47 तक भारत में दृश्य चन्द्रग्रहण सिंह राशि व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा जिसका सूतक 3 मार्च को सुबह 6.20 बजे से प्रारम्भ हो जाएगा।
अतः होलिकादहन 3 मार्च को सूर्योदय से पूर्व ही किया जाएगा। पंडित के सी पाण्डेय ने बताया कि निर्णय सिंधु ग्रंथ उदाहरण देते हुए कहा कि स्पष्ट लिखा है ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्य श्रावणी फाल्गुनी तथा श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी” अर्थात शास्त्रों में होलीकादहन के समय भद्रा हो तो अशुभ कहा गया है एक अन्य वचन अनुसार “भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभङ्गं करोति वै। नगरस्य च नैवेष्टा तस्मात्तां परिवर्जयेत्।। अर्थात भद्रा में होली को प्रदीप्त (जलाने पर) करने पर निश्चय राष्ट्रभंग करती है तथा नगर का भी इष्ट नहीं करती है अनिष्ट होता है अतः उसको त्याग दे।
साथ ही ग्रहण होने पर शास्त्र वचन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्पष्ट लिखा है “अत्र चेच्चन्द्रग्रहणं तदा ततोऽर्वानिशि भद्रावर्जपौर्णमास्यां होलिकादीपनम्। अर्थात यदि चन्द्रग्रहण हो तो पहली रात में भद्रा से रहित पूर्णिमा में होलिका को प्रज्वलित करे अतः धर्मग्रंथो के अवलोकन के बाद होलिका दहन के लिए 3 मार्च को सूर्योदय पूर्व 5.29 बजे से 6.19 बजे तक 50 मिनट का समय भद्रा एवं ग्रहण रहित तथा पूर्णिमायुक्त पूर्णतः शास्त्रसम्मत सही समय है होलिका पूजन समय के लिए धर्मग्रंथ में लिखा है “निशागमे प्रपूज्येत होलिका सर्वदा बुधैः। न दिवा पूजयेत् ढुंढां पूजितां दुःखदा भवेत्”।। अर्थात सभी निशा (रात्रि) के आने पर होलिका का पूजन करे दिन में ढुण्ढा (होलिका) का पूजन न करे दिन में पूजन करने पर दुःख को देनेवाली होती है अतः होलिकापूजन 02 मार्च को रात्रि 8.15 के बाद मघा नक्षत्र एवं सुकर्मा योग में किया जाएगा तथा 03 की सुबह (भोर) 4 बजे से 5.30 बजे तक पूजन करना अधिक शुभ रहेगा। पूर्णिमा तिथि चन्द्रोदययुक्त होने से 02 मार्च व्रत की पूर्णिमा तथा स्नान, दान की पूर्णिमा 03 मार्च को रहेगा, होलिका पूजन में उपले, नारियल, पान, सुपारी, अक्षत, जल, बतासा धूप, गंध, चना के साथ मिष्ठान चढ़ाना चाहिए साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र जप करना चाहिए होलिकापूजन व दहन के समय मंत्र- अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥ जप करते हुए होलिका की 7 बार परिक्रमा करें तथा जलती हुई होलिका में गेहूँ की बालियां भूनने की भी परम्परा है श्री होलिकायै नमः का जप करते हुए 3 परिक्रमा भी कर सकते है.

भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व स्याना मंडल मीडिया प्रभारी गौरव त्यागी स्याना की ओर से होली एवं ईद की दिली मुबारकबाद



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