बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): दीपावली का अंतिम पर्व भैयादूज 23 अक्टूबर वृहस्पतिवार को आयुष्मान योग एवं रवि योग शुभ मुहूर्त में मनाया जायेगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पं0 के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात्रि 8.17 बजे से प्रारम्भ होकर 23 अक्टूबर की रात्रि 10.47 बजे तक रहेगा। निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु आदि ग्रंथो के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया (भैयादूज) अपरान्हकालीन पर्व है। बृहस्पतिवार को सूर्योदय से रात तक अर्थात पूरे दिन द्वितीया तिथि प्राप्त है तथा 1.27 बजे तक चल, लाभ, अभिजीत मुहूर्त, अमृत चौघड़िया है जिसमें बहन के घर स्नान, बहन द्वारा भाई का तिलक व भोजन कराने से विशेष शुभ फल प्राप्त होगा। महासभा व्रत पर्व विधिज्ञा अनिशा सोनी पाण्डेय ने भैयादूज के सम्बन्ध में पौराणिक कथा बताया कि इस दिन यमराज जी अपनी बहन यमुना के घर गये थे। बहन के स्वागत सत्कार से पूर्ण संतुष्ट होकर यमराज ने यमुना जी को आशीर्वाद वचन दिया कि जो भी भाई इस दिन बहन के घर स्नान व भोजन करेगा। उसकी कभी अकाल मृत्यु नहीं होगी। बहन को यथाभाव सामर्थ्य अनुसार कुछ ना कुछ उपहार अवश्य देना चाहिए। इस दिन जो बहन भैया का तिलक व ताम्बुल आदि से पूजन कर गोला (नारियल) प्रदान करती है वो कभी विधवा नहीं होती तथा इससे दोनों समृद्ध रहते है। संभव हो तो इस दिन दोनों को यमुना नदी में स्नान करना चाहिए या यमुना जल या गंगाजल मिलाकर यमुना ज़ी का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। यह कथा तीनों लोकों में सुनी जाती है। इस दिन भाई को अपने घर में भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए, एक दूसरी कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर गये थे और वही पर भोजन किया था और आशीर्वाद दिया था इसलिए भी भैयादूज मनाया जाता है.
भैयादूज मंगल तिलक श्रेष्ठ मुहूर्त
23 अक्टूबर, वृहस्पतिवार
सुबह 10.38 बजे से दोपहर 1.27 बजे तक है.
विशेष परिस्थिति में दोपहर बाद 4.17 बजे से रात्रि 8.52 तक शुभ, अमृत, चल की चौघड़िया में भी कर सकते है.
दोपहर 1.27 से 2.52 बजे तक राहुकाल में मंगल तिलक ना करें.
जानिए भैयादूज मंगल तिलक श्रेष्ठ मुहूर्त
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