बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): जनपद बुलंदशहर के अनूपशहर क्षेत्र के गंगा देवी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में एक बड़ा हादसा होने से टल गया। ओपीडी कमरे में चिकित्सक मरीजों को देख रहे थे। तभी अचानक कमरे की दीवार भर भर कर नीचे आखिरी इस दौरान वहां मौजूद महिला डॉक्टर स्टाफ नर्स और वार्ड आया ने भाग कर अपनी जान बचाई। घटना की जानकारी मिलती ही तहसीलदार प्रिया सिंह मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त ढांचे का मुआयना किया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1990 में बुलंदशहर के अंसारी रोड निवासी विश्वनाथ कौशिक वैद्द ने तत्कालीन अधिकारी की प्रेरणा से यह जमीन दान दी थी। इसके बाद 1991 से किस अस्पताल का संचालन शुरू हुआ था। अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नेहा शर्मा ने बताया कि मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे वह स्टाफ नर्स रश्मि लता के साथ ओपीडी कमरे में मरीजों की जांच कर रही थी। इसी दौरान अचानक कमरे की एक दीवार भरभरकर नीचे आ गिरी। दीवार गिरती देख दोनों ने तुरंत बाहर की ओर दौड़कर अपनी जान बचाए वहीं पास के कमरे में मरीजों की दवा बांट रही वार्ड आया कमलेश कुमारी भी बाल-बाल बची।
अस्पताल प्रभारी का कहना है कि भवन की जर्जर हालत को लेकर पिछले 13 वर्षों से लगातार उच्चधिकारियों को पत्र लिखा जा रहा है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। उच्चधिकारियों के लापरवाही से जर्जर अस्पताल की दीवार गिरने से एक बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
आयुर्वेदिक चिकित्सालय की ओपीडी की गिरी दीवार, स्टाफ व मरीजों ने भागकर बचाई जान
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