बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): एक किशोरी की हत्या और एक किशोरी के साथ गैंगरेप के मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपी संदीप और अमित छह मई की शाम जनपद गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर से दो किशोरियों को कार में बैठाकर गाजियाबाद पहुंचे। गाजियाबाद पहुंचने पर दोनों युवकों ने लोनी निवासी अमित के रिश्तेदार गौरव को कार में बैठा लिया। इसके बाद आरोपियों ने बीयर की केन खरीदी। फिर आरोपी पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर पहुंचे। एक्सप्रेसवे से उतरने के बाद बागपत सीमा में घुसे। वहां से मेरठ के जानी पहुंचे। आरोप है कि आरोपियों ने खुद बीयर पीने के साथ किशोरियों को भी जबरन बीयर पिलाई। इसके बाद किशोरियों के साथ छेड़खानी शुरू की। किशोरियों द्वारा विरोध करने पर मेरठ के जानी में पहुंचकर एक किशोरी को धक्का देकर कार से फेंक दिया जिसकी मौत हो गई। इसके बाद तीनों आरोपी मेरठ और हापुड़ को पार करते हुए सात मई को बुलंदशहर हाईवे पर पहुंचे। बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार, किशोरी ने आरोपियों से लखनऊ जाने की इच्छा जाहिर की जिसके बाद आरोपी उसको लेकर लखनऊ जाने लगे। खुर्जा पहुंचने पर किशोरी बहाना बनाकर कार से उतरी और किशोरी थाना खुर्जा नगर पहुंची।
पुलिस पर उठे सवाल
अब सवाल यह है कि यह तीनों आरोपी गौतमबुद्धनगर से बुलंदशहर तक छह जिलों की सीमा से होते हुए गुजरे। लगभग 12 घंटे तक आरोपी हाईवे और एक्सप्रेसवे पर घूमते रहे और आरोपी चलती गाड़ी में किशोरी के साथ गैंगरेप करते रहे। इन छह जिलों के बीच कोई पुलिस चेक पोस्ट, टोल प्लाजा, सीसीटीवी और पुलिस की कोई नाकाबंदी क्यों नहीं थी?
अगर ऐसा होता तो इन दोनों किशोरियों की शायद जान बच सकती थी। इन 12 घंटो के बीच इन छह जिलों की पुलिस कहाँ सो रही थी?
यह तीनों आरोपी गाड़ी से जिन छह जिलों से गुजरे वह सभी स्थान सीसीटीवी कैमरा से लैस है। इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद भी पुलिस सोने में व्यस्त नजर आई।
क्या पुलिस सिर्फ फोटो खिचवाने और सोशल मीडिया पर अपलोड कर लोगों को दिखाने के लिए ही चेकिंग करती है?
क्या पुलिस की ड्यूटी यही तक सीमित है?
चलती गाड़ी में गैंगरेप, छह जिलों की सीमाओं से होकर गुजरी थी कार
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