बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): जनपद बुलंदशहर में शुरू की गई फोरेंसिक वर्कशॉप अब पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मॉडल बन सकती है। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को फोरेंसिक साक्ष्यों की बेहतर समझ और उनके प्रभावी इस्तेमाल के लिए जागरूक करने की पहल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सराहा है। बुलंदशहर में जिला जज और पुलिस अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से फोरेंसिक वर्कशॉप की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच उनके महत्व और अदालत में उनके प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी देना है।
बताया जा रहा है कि बुलंदशहर में शुरू किए गए इस मॉडल को अब प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे विवेचना में फोरेंसिक साक्ष्यों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। हाईकोर्ट ने जिला जज और संबंधित अधिकारियों के संयुक्त प्रयास की सराहना करते हुए इस पहल को महत्वपूर्ण माना है। अब बुलंदशहर की यह पहल प्रदेश के दूसरे जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
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