बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): प्रदेश में निजी पंजीकरण वाले वाहनों के व्यावसायिक प्रयोग से राज्य सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा हैं। अंतराष्ट्रीय परामर्शदाता कंपनी डिलॉयट और नियोजन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश को 10 खबर डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण में वृद्धि एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।
यातायात निदेशालय ने सभी पुलिस आयुक्त और जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र जारी किया हैं। पत्र के मुताबिक परिवहन विभाग द्वारा 1 से 15 जून तक इस पर अंकुश लगाने के लिए राज्य स्तरीय विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा हैं, जिसमें पुलिस का सहयोग अपेक्षित हैं। अभियान के तहत ऐसे वाहनों पर कार्यवाही की जाएगी, जो बिना वैध वाणिज्यिक पंजीकरण के व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हैं।
कैब सर्विस व ट्रेवल एजेंसी लिप्त
कैब सर्विस वाली तमाम कंपनियां और ट्रेवल एजेंसी निजी पंजीकरण वाले वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करती हैं। कई सरकारी विभागों में भी ऐसे वाहनों का संचालन हो रहा हैं। कार और बाइक की कैब सुविधा देने वाली कंपनियां भी निजी वाहनों के जरिये सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे राज्य सरकार को कोई राजस्व नहीं मिलता हैं।
ट्रैक्टर ट्रॉली से भी राजस्व की हानि
उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर ट्रालियों से भी राजस्व की हानि हो रही हैं। ऐसी ट्रैक्टर ट्रौलियों का पंजीकरण निजी आधार पर हैं, जबकि उनका इस्तेमाल व्यवसाय में हो रहा हैं। उन ट्रालियों से लोहा, सीमेन्ट रोडी, बदरपुर, सरिया, सब्जी, फर्नीचर, ईट आदि ढोई जा रही हैं। प्रदेश का शायद ही कोई जनपद ऐसा बचा हो जहां हजारों की तादाद में माल से लदी ट्रैक्टर ट्रोलियां सड़क पर न दौड़ रही हो।
प्राईवेट वाहनों के व्यवसाय में इस्तेमाल से राजस्व की हानि
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