बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): बुलंदशहर में पराली जलाने वाले किसानों पर अब प्रशासन सख्ती करने जा रहा है। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। पराली जलाने पर जुर्माने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।
आपको बता दें कि धान की कटाई का समय नजदीक आते ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। जिले की सभी 7 तहसीलों और 16 ब्लॉकों में निगरानी के लिए टीमें गठित की गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक डॉ. रेखा सिंह के मुताबिक, फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उप कृषि निदेशक यशपाल कुमार ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए तहसील और ब्लॉक स्तर पर टीमों को जिम्मेदारी दी गई है। टीमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। कृषि विभाग की ओर से पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों की खरीद पर ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से 80 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जा रहा है। वहीं जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने बताया कि एनसीआर में लागू संबंधित प्रावधानों के तहत पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है। दो एकड़ से कम जमीन पर पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक दस हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान बताया गया है।
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