बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): जनपद बुलंदशहर के सदर तहसील क्षेत्र के गांव नीमखेड़ा निवासी 68 वर्षीय बुजुर्ग ने कुत्ते के काटने पर हकीम से दवा ले ली जिसके बाद धीरे-धीरे करके उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद बुजुर्ग ने आगरा के एक अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बुजुर्ग की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
आपको बता दें कि बुजुर्ग राजेंद्र शर्मा के पुत्र पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में पिता को गांव में ही एक लावारिस कुत्ते ने बाएं पैर में पीछे से काट लिया था जिसके बाद उन्होंने रेबीज से बचाव के लिए गांव अच्छेजा के एक हकीम के पास चले गए और दवाई पी ली। पुष्पेंद्र का कहना है कि 29 जून की दोपहर में पिता को घबराहट होने लगी। वह पानी देखकर डरने लगे और जीभ भी लड़खड़ाने लगी। इसके बाद वह उन्हें एक चिकित्सक के यहां ले गए जहां से उन्हें हायर सेंटर दिल्ली रेफर किया गया। उसके बाद दिल्ली के चार चिकित्सालयों में दिखाने के बाद परिजन बुजुर्ग को आगरा लेकर गए। 1 जुलाई को आगरा में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
24 से 48 घंटे में लगवाएं एआरवी की पहली डोज:
एआरवी के नोडल अधिकारी डॉ. रमित कुमार ने बताया कि कुत्ता, बंदर, बिल्ली या अन्य जंगली जानवर के काटने पर 24 से 48 घंटे में पहली डोज लगवा लेनी चाहिए। दूसरी डोज तीन दिन बाद, तीसरी सात दिन बाद और चौथी 14 दिन बाद या जरूरत पड़ने पर 28 दिन बाद लगवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने पर टीका नहीं लगवाने पर रेबीज के लक्षण एक माह बाद या दो साल बाद ही नहीं बल्कि 15 साल बाद तक भी सामने आ सकते हैं।
कुत्ते के काटने के बाद बुजुर्ग ने ली हकीम से दवाई, मौत
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