बुलंदशहर, डेस्क (जय यात्रा): जनपद बुलंदशहर के थाना बुलंदशहर नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला साठा की रहने वाली 10 वर्षीय चारु कश्यप सड़क पर जलभराव होने से खुले नाले में गिर गई थी जिसके बाद छात्रा चारु का शव पांचवे दिन शनिवार को 93 घंटे बाद 4 किलोमीटर दूर काली नदी में मिला। पुलिस ने छात्रा के शव का पोस्टमार्टम कराकर सीधे अंतिम संस्कार करा दिया। छात्रा चारु कश्यप के मौत के मामले में आखिर कौन गुनहगार है? अगर देखा जाए तो नगर पालिका बुलंदशहर अपना कार्य समय से निभाती तो यह हादसा नहीं होता, प्रशासन समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाते तो आज छात्रा चारु अपने परिवार के बीच होती, बुलंदशहर नगर पालिका के ईओ अपने कार्यों के प्रति ढील नहीं बरतें तो आज एक छात्रा मौत की बली नही चढ़ती। वहीं स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी निभाता तो शायद चारु सभी के बीच होती। मामले में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा के दर्ज किया, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे पुलिस के कार्यशैली पर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
आपको बता दें कि नगर के मोहल्ला साठा धर्मपाल वाली गली निवासी रिंकू कश्यप की बेटी चारु भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित सुशीला पब्लिक स्कूल में कक्षा चार में पढ़ती थी। मंगलवार को तेज बारिश हो रही थी जिससे सड़क पर जलभराव हो रहा था। करीब साढ़े बारह बजे वह स्कूल से लौटते समय खुले नाले में बह गई थी। नाले में गिरने के बाद छात्रा को लोगों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव तेज होने के चलते चारु का कुछ पता नहीं चल सका। छात्रा चारु कश्यप के बहाने की सूचना जैसे ही उसके परिजनों को लगी तो परिजनों में कोहराम मच गया। इसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया और नाव, मोटरबोट व ड्रोन की मदद से छात्रा को काफी तलाशा, लेकिन उसका कुछ नहीं पता चल सका। चौथे दिन सुबह दस बजे बागपत के गोताखोर इरफान और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला। जोन में बांटकर 15 किमी के दायरे में तलाशी अभियान चलाया गया। पांचवें दिन शनिवार को सुबह से ही इरफान की टीम ने चारू को खोजने के लिए फिर कमर कसी। लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद उसे खोज निकाला। बच्ची का शव चावली के पास काली नदी में कूड़े में अटका हुआ था।
शव मिलते ही मची चीख-पुकार
चारू का शव जैसे ही बाहर आया वहां मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटी के सुरक्षित लौटने की दुआएं मांगी जा रही थीं, वह अंतिम बार अपने घर भी नहीं पहुंच सकी। पुलिस-प्रशासन ने पोस्टमार्टम के बाद शव एंबुलेंस से सीधे श्मशान घाट भेज दिया। यहां हजारों लोगों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े भाई गगन ने उसे मुखाग्नि दी। इस दौरान हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी कि इंतजाम ठीक होते तो आज चारू जिंदा होती।
आखिर कौन है छात्रा चारु कश्यप की मौत का गुनहगार?
बुलंदशहर नगर पालिका बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन चारु की खुले नाले में डूबने से हुई मौत के बाद नगर पालिका बुलंदशहर सवालों के घेरे में है। वहीं यदि स्कूल प्रबंधन अपने जिम्मेदारियों में लापरवाही नही बरता तो आज जिला बुलंदशहर एक बेटी ना खोता। पुलिस अभी तक पता नही लगा पाई है कि छात्रा चारु कश्यप की मौत का जिम्मेदार कौन है? उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
खुले नाले में गिरी छात्रा चारु की मौत का जिम्मेदार कौन?
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